धान की कटाई और गेहूं की बिजाई हो गई, अब अगले साल आएंगे,गांव लौटने का तर्क- दो महीने पहले भूखे मरने की नौबत आ गई थी, अब तो बस वापस जाना है
यूपी बिहार से आकर यहां काम करने वाले श्रमिकों को लाॅकडाउन की चिंता सताने लगी है। इस कारण उन्होंने परिवारों समेत पलायन करना शुरू कर दिया है। हालांकि वे ट्रेनों के परिचालन से काफी खुश हैं क्योंकि सामान ले जाने और कम किराये के कारण उन्हें राहत भी मिली है। जिन्हें जालंधर से ट्रेन नहीं मिल रही, वे अंबाला से ट्रेन पकड़ रहे हैं। श्रमिकों का कहना है कि धान की कटाई और गेहूं की बिजाई हो चुकी है। इसलिए अब अगले साल ही आएंगे।
सिटी से एक ही ट्रेन गई, 350 यात्रियों ने किया सफर
जालंधर | सिटी स्टेशन से वीरवार को सिर्फ शहीद एक्सप्रेस ही रवाना हुई। इसमें जालंधर से 250 और कैंट से करीब 100 यात्री रवाना हुए। वहीं दो ट्रेनें जालंधर पहुंचीं, जिन्हें अमृतसर के लिए वाया तरनतारन डायवर्ट किया गया है। इसके अलावा जम्मू से 3 ट्रेनें कैंट पहुंचीं। इनमें 60 यात्री आए और चार ट्रेनें कटरा की तरफ रवाना हुईं, जिनमें 100 यात्रियों ने सफर किया। इसके अलावा यूरिया की 28 हजार बोरियां माल गोदाम पहुंचीं, जिन्हें लोड करके सप्लाई कर दिया गया। सीमेंट की भी 18 हजार बोरियां मालगाड़ी से आईं। जबकि जालंधर से चावल दूसरे राज्यों में भेजा गया।`
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