जिला प्रशासन ने शुक्रवार को तहसील परिसर में खाली पड़े 53 बूथों में से 39 बूथों की नीलामी करवाई। इन बूथों काे पाने के लिए 129 लोगों ने आवेदन किया था। नीलामी का काम दोपहर 12 बजे से शुरू हुआ।
इस दौरान आवेदन करने वालों और प्रशासनिक अधिकारियों के बीच कई बार तीखी नोकझोंक हुई। बूथ नंबर 201 की बोली लगाने के दौरान उस समय झड़प हुई, जब संबंधित अधिकारी ने रिजर्व प्राइज 50 हजार रख दिया। इससे अधिक बोली लगाने के दबाव को लेकर दोनों पक्षों में कहासुनी हुई। वहीं आवेदकों के न आने से 39 में से 12 बूथों की नीलामी नहीं हो सकी।
कुछ लोगों का कहना है कि रिजर्व प्राइज अधिक होने से बूथ लेने के लिए आवेदक आगे नहीं आए। एडीसी जसबीर और एसडीएम-1 की देखरेख में नीलामी का काम शुरू हुआ। इससे पहले साल 2011 में बूथों के अलॉटमेंट की प्रक्रिया शुरू हुई थी। मगर मामला काेर्ट में पहुंच जाने के बाद अलॉटमेंट का काम अधर में लटक गया था। करीब 9 साल बाद खाली पड़े 53 बूथों की नीलामी के लिए प्रशासन ने नोटिफिकेशन जारी किया था। वहीं 14 बूथों के मामले कोर्ट तक पहुंचने से इनकी नीलामी नहीं करवाई गई।
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