अगले दो दिन में इलाका निवासियों को पानी के लिए तरसना पड़ सकता है, नगर निगम के वाटर वर्क्स की डिग्गियों में पानी खत्म हो गया है, तीन दिनों से एक समय पानी को सप्लाई करके काम चलाया जा रहा है। किसी इलाके में सुबह तो कहीं शाम के समय पानी सप्लाई किया जाता है, लोगों को जानकारी न होने की वजह से लगभग हर इलाके में पानी की किल्लत बनी हुई है। सिंचाई पानी की जरूरत न होने पर नहर में पानी बंद करने के 5 दिनों में ही नगर निगम के वाटर वर्क्स की डिग्गियां सूख गईं। डिग्गियों को क्षमता से आधा ही भरा जाने की वजह से ऐसे विस्फोटक हालात हर बार बनते हैं। तीनों वाटर वर्कर्स की पानी डिग्गियों की 10 सालों से अधिक समय से डीसिल्टिंग न होने कारण उनमें काफी मात्रा में मिट्टी व गार जम चुकी है। नगर निगम की लापरवाही की वजह से हर बार प्रचंड गर्मी के दिनों में इलाका निवासियों को बूंद-बूंद पानी के लिए तरसना पड़ता है।
नहर में 19 जुलाई से रोकी पानी की सप्लाई
सिंचाई विभाग की ओर से बरसात की वजह से फसलों को पानी की ज्यादा जरूरत न पड़ने की वजह से कम खपत को देखते हुए नहर में 19 जुलाई से पानी की सप्लाई बंद कर दी जिससे 21 जुलाई को सरहिंद नहर खाली हो गई। वाटर सप्लाई विभाग के अधिकारियों का तर्क है कि नहरबंदी की पूर्व सूचना न होने की वजह से वे पानी स्टोर नहीं कर सके और अब डिग्गियां सूखने की वजह से इलाके में एक समय पानी सप्लाई दी जा रही है।
नहरी विभाग के एक्सईएन इंजी. गुरजिंदर सिंह बाहिया के अनुसार 27 जुलाई की रात को रोपड़ हेड से पानी छोड़ दिया गया और जरूरत के मुताबिक नहर में मंगलवार तक 900 क्यूसेक पानी भरा गया है। बरसात के दिनों में नहरों को टूटने से बचाने के लिए एहतियात के तौर पर नहरों में पानी की सप्लाई बंद की जाती है। नियमानुसार वाटर वर्क्स विभाग को 18-20 दिन के पानी स्टोरेज का बंदोबस्त करके रखना चाहिए, 5-6 दिनों में डिग्गियों का पानी खत्म होना बेहद गंभीर विषय है।
डिग्गियों में 3 फुट तक जमी है गार
निगम के वाटर वर्कर्स के पानी के स्टोरेज टैंक डिग्गियों की 10 सालों से अधिक समय से डीसिल्टिंग न होने कारण उनमें 4 फुट मिट्टी व गार जम चुकी है। वाटर वर्क्स की डिग्गियों की क्षमता 708 मिलियन लीटर है जिनमें लगभग 40 प्रतिशत गार भरी होने की वजह से 496 मिलियन लीटर क्षमता कम हो गई है। शहर के प्रमुख रोजगार्डन वाटर वर्क्स की तीनों डिग्गियों में 8 दिनों तक पानी स्टोरेज किया जा सकता है। नगर निगम इलाका निवासियों को सौ फीसदी वाटर सप्लाई देने के लिए पांच सालों में करोड़ों रुपए खर्च कर चुका है, लेकिन निगम ने वाटर स्टोरेज बढ़ाने पर कभी ध्यान नहीं दिया। पानी डिग्गियों की डीसिल्टिंग करवाने के लिए करीब 3 करोड़ का एस्टीमेट बना था जिसे निगम ने मंजूरी नहीं दी। इसका दोबारा एस्टीमेट नहीं बनाया जा सका। निगम को त्रिवेणी कंपनी निगम ने पत्र लिखकर पानी डिग्गियों की डीसिल्टिंग करवाने के लिए कहा ताकि उनकी पानी स्टोरेज की कैपेसिटी बढ़ाई जा सके, लेकिन निगम व वाटर सप्लाई विभाग ने इसे भी कभी गंभीरता से नहीं लिया।
5 सब वाटर वर्क्स, 13 स्टोरेज टैंक
शहर की 3 लाख 82 हजार की आबादी को पानी की आपूर्ति करने के लिए नगर निगम के पास दो मेन वाटर वर्क्स समेत 5 सब वाटर वर्क्स हैं जहां 13 वाटर स्टोरेज टैंक हैं। निगम की ओर से इलाके में प्रतिदिन 55 मिलियन लीटर पानी की सप्लाई दी जाती है। अकेले मुख्य रोजगार्डन वाटर वर्क्स से रोजाना 12.3 मिलियन गैलन यानि 4 करोड़ 65 लाख लीटर पानी की आपूर्ति होती है। शहर में एक दिन में 115 लाख गैलन पानी की खपत है। वाटर सप्लाई और सीवरेज बोर्ड के पास तीन वाटर वर्कर्स हैं जिनमें 10 मिलियन गैलन ( एमजी) की क्षमता वाला रोजगार्डन वाटर वर्कर्स, मानसा रोड स्थित इंडस्ट्रियल ग्रोथ सेंटर में 1.5 एमजी वाटर वर्कर्स के अलावा आईटीआई 2 एमजी वाटर वर्कर्स है। वहीं चौथा वाटर वर्क्स वाटर वर्कर्स का निर्माण 1995 में भागू रोड पर हुआ, जिसे वाटर सप्लाई एवं सेनिटेशन विभाग संचालित करता है और 15 एरिया इंडस्ट्रियल ग्रोथ सेंटर, जस्सी पौ वाली, हरबंस नगर, मतिदास नगर व बंगी नगर आदि को इससे पीने वाले पानी की सप्लाई होती है।
ग्रोथ सेंटर के वाटर वर्क्स से निकाली 12 फीट जमी गार
मानसा रोड स्थित ग्रोथ सेंटर वाटर वर्कर्स की डिग्गियों की 25 साल में पहली बार टैंक नंबर 1 व 2 में सफाई हुई। लगभग 5 एकड़ में बने इस 14 फीट गहरे टैंक में करीब 12 फीट तक गार जमी निकाली गई। भयंकर बदबू मार रही इस काली गार की 500 से ज्यादा ट्रालियां टैंक नंबर 1 से निकाली गई। डिग्गियों की क्षमता भी मात्र 2 से 4 फीट तक बची थी।
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