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तस्करों की दहशत ऐसी कि रिश्ते भी नहीं आते थे, लॉकडाउन में नशा नहीं मिला तो युवाओं ने की तौबा, अब गूंज रहे भगत सिंह

(हरपाल रंधावा) कोरोना ने दुनियाभर में तूफान मचा रखा है, वहीं पंजाब के गांवों में नशे को लेकर बदलाव दिख रहा है। नशे के लिए बदनाम 3 गांवों की कहानी पढ़िए- जहां शरीफ लोग बेटी की शादी करना पसंद नहीं करते थे। हर दूसरे-तीसरे घर में नशे में खत्म होता युवा रहता था या फिर तस्कर। लॉकडाउन में हर गांव में पहरा रहा। नशा नहीं मिला तो युवाओं ने इसे छोड़ना ठीक समझा। अब ये ओट से नशा छुड़ाने की गोलियां खा रहे हैं। गांवों की दीवारों पर भगत सिंह की देशभक्ति वाले स्लोगन लिखे जा रहे हैं। साफ शब्दों में कहें तो यहां विकास और जागरूकता की बयार चल रही है।

गांव हवेलियां : तस्करों के कारण पुलिस भी घबराती थी, अब यहां शिक्षा की बात होती है

तरनतारन जिले का गांव हवेलियां। भारत-पाकिस्तान सीमा से सटा अंतिम गांव की 1980 के दशक तक 11 मेंबरी कबड्‌डी टीम थी। पहलवानी में चढदे व लहंदे पंजाब में नाम गूंजता था। नशे में कबड्‌डी व पहलवानी दोनों खत्म कर दी। तस्करों की तूती बोलने लगी। तस्करों की दहशत से पुलिस भी घबराती थी। लोग बंकरों में छिपे होते थे। अब यहां शिक्षा की बात होती है।

नौशहरा गांव : यहां नशा छोड़कर अब फौज की तैयारी कर रहे युवा

नौशहरा गांव तरनतारन जिले में भारत-पाक सीमा से सटा है। यहां कई अंतरराष्ट्रीय समग्लर हुए। अब लॉकडाउन में गांव में नशे का भारी बदलाव आया। लोगों का कहना है कि बैसाखी का मेला और गांव की पहलवानी दुनिया में मशहूर थी। नशे ने सब बिगाड़ दिया। अब नशा को छोड़ने की जागरुकता आई है। नशा छोड़ युवा अब फौज में जाने की तैयारी कर रहे हैं।

दौलेवाला : यहां बनानी पड़ी चौकी, अब युवा जा रहे ओट
मोगा जिले का दौलेवाल गांव। आबादी 4 हजार। पढ़े लिखे लोग केवल 20%। नशे के लिए बदनाम इतना कि गांव में पुलिस चौकी बनानी पड़ी। यहां के अधिकांश लोगों पर नशे के कई-कई केस हैं। अब यहां लॉकडाउन में बदलाव दिखा है। पहले गांव लोग आने से डरते थे। अब गांव में विकास के काम हो रहे हैं। सरपंच सुखविंदर दीवारों पर नशा से बचाव के जागरुकता स्लोगन लिखवा रहे हंै। पहले लोग ही विरोध करते थे। अब युवा नशा छोड़ने ओट जा रहे हैं।



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The smugglers' panic was such that the relationship did not come, if the drug was not found in the lockdown, then the youth gave up, now Bhagat Singh is echoing


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तस्करों की दहशत ऐसी कि रिश्ते भी नहीं आते थे, लॉकडाउन में नशा नहीं मिला तो युवाओं ने की तौबा, अब गूंज रहे भगत सिंह तस्करों की दहशत ऐसी कि रिश्ते भी नहीं आते थे, लॉकडाउन में नशा नहीं मिला तो युवाओं ने की तौबा, अब गूंज रहे भगत सिंह Reviewed by Dibyendu on 17:09 Rating: 5

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