खेतीबाड़ी कानून रद्द कराने को लेकर आंदोलित किसानों द्वारा जारी लड़ीवार भूख हड़ताल में यहां सोमवार को महिला जत्था बैठा। इन महिलाओं ने फिरोजपुर रोड स्थित धरनास्थल पर सरबत के भले के लिए अरदास भी की। इनमें नजदीकी गांव थरीके की गृहणियां जसपाल कौर, हरजिंदर कौर, परमजीत कौर, हरभजन कौर व सरबजीत कौर शामिल थीं।
हौंसला आफजाई को राजिंदर कौर भी दिनभर उनके साथ बैठीं।नामवर शायरों के कलाम “जंग लाजिमी है तो जंग ही सही’ और “जिनका काम अहले-सियासत, वो जाने’ को अपने जज्बातों में ढाल उन्होंने कुछ ऐसा ही कहा। बोलीं कि पूरे समाज के भले के लिए अरदास की गई है। अपने हक के साथ ही समाजहित में बड़ी तादाद में किसान जानलेवा सर्दी में दिल्ली बॉर्डर पर डटे हैं।
कई कुर्बानी भी दे चुके हैं, मगर सरकार खेतीबाड़ी कानून रद्द करने को राजी नहीं है। लिहाजा किसान सेहतमंद रहते फतेह हासिल करें, सरकार मान जाए व बिना कोई बड़ी गड़बड़ी आंदोलन खैरियत से निपटे, यही अरदास की है। किसानों-सरकार में कौन सही या गलत, कौन सियासत कर रहा है, इससे हमें मतलब नहीं है। हमारा मकसद तो हक के लिए लड़ते किसानों के साथ आंदोलन में शामिल होनेे का पैगाम सब तक पहुंचाना है।
इधर, आंगनबाड़ी वर्कर दिल्ली-कूच को तैयार:किसान आंदोलन में शिरकत के लिए 30 दिसंबर को पूरे सूबे से आंगनबाड़ी वर्करों के जत्थे भी दिल्ली बॉर्डर पर जाएंगे। जिले से जाने वाली वर्करों की अगुवाई यूनियन की प्रदेश प्रधान सुभाष रानी करेंगी।
सूबे में पहले भी मोर्चे में शामिल हो कुर्बानी दे चुकी हैं महिलाएं
सूबे में कैरों सरकार के वक्त भी किसान आंदोलित होने पर महिलाएं मोर्चे में शामिल हुई थीं। तब आंदोलनकारियों पर गोली चली थी, जिसमें जिले के गांव एतियाणा की माता बचन कौर शहीद हुई थीं। तब सरकार को झुकते हुए सिंचाई पानी से टैक्स हटाना पड़ा था। तब समाज में पर्दा प्रथा थी, अब महिलाएं जागरूक हैं और इस ऐतिहासिक आंदोलन में बड़ी तादाद में शिरकत कर इतिहास रच रही हैं। नारी शक्ति से मजबूत आंदोलन के चलते अब केंद्र सरकार को झुकना पड़ेगा। -कॉ.तरसेम जोधां, पूर्व विधायक
नारी शक्ति से आंदोलन को मिली मजबूती-घर की चारदीवारी से निकल महिलाओं के मोर्चे में शामिल होने से आंदोलित किसानों को मजबूती मिली है। वहीं अड़ियल बनी केंद्र सरकार के लिए चुनौती बढ़ेगी। यह समाज में बदलाव का बड़ा संकेत है। किसानों के बहाने जागी महिलाएं अब अपने हकों के लिए भी लड़ेंगी। उम्रदराज होने के बावजूद मैं भी जल्द दिल्ली बॉर्डर जाऊंगी।
-डॉ.गुरचरण कौर कोचर, साहित्यकार व एक्टिविस्ट
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