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‘जीता’ स्पेशल ओलंपिक में डबल गोल्ड मेडल, मगर सिस्टम से ‘हारा’

सरकारी-सिस्टम कितना संवेदनहीन है, होनहार खिलाड़ी राजबीर से बेहतर इसे कोई नहीं समझा सकता है। अस्पताल में दाखिल इस गोल्ड मेडलिस्ट को बीमारी के दर्द से ज्यादा इसी सरकारी बेरुखी से गहरा सदमा लगा है।मैंटली चैलेंज्ड व स्पेशल ओलंपिक में डबल गोल्ड मेडल विजेता राजबीर इन दिनों शहर के एक निजी अस्पताल के आईसीयू वार्ड में दाखिल हैं। परिजनों के मुताबिक दौरे पड़ने के कारण अब उन्हें होश नहीं है। घर की माली हालत ठीक न होने के कारण मदद की सख्त ज़रुरत है। बेबस परिजनों ने सरकार से मदद की गुहार भी लगाई, मगर सुनवाई नहीं हुई।

गरीबी व बेटे की बीमारी से टूट चुके उनके पिता बलबीर सिंह के मुताबिक राजबीर पिछले साल बीमार हुए थे। तब अस्पताल में दाखिल कराने पर वह संभले, मगर फिर दौरे पड़ने लगे। हफ्ता भर पहले निजी अस्पताल में दाखिल कराया गया। बलबीर बताते हैं कि आर्थिक संकट के बावजूद उनके बेटे ने देश के लिए ओलंपिक में साइकिलिंग में दो गोल्ड मेडल जीते। केंद्र सरकार की ओर से 10 लाख की इनाम राशि दी गई, लेकिन पंजाब सरकार ने ऐलान की राशि करीब 60 लाख अभी तक नहीं दी है। अगर सरकार पैसे दे देती है तो राजबीर का इलाज आसानी से करा सकते थे।
मनुखता दी सेवा सोसायटी कर रही मदद -राजबीर के अस्पताल का खर्च मनुखता दी सेवा सोसायटी के सदस्य उठा रहे हैं। वह मैडल जीतने के बाद सोसायटी सदस्यों के पास ही कार्यरत थे। मुल्लांपुर के पास स्थित सोसायटी के आश्रम में रहते वक्त मजबूर लोगों की सेवा करते थे। हालांकि पिछले एक साल से खुद बीमार चल रहे थे। पहले उनकी आंख में पहले इंफेक्शन हो गया था। जिसके बाद उनका इसी साल जनवरी में आपरेशन किया गया था। हालांकि वह ठीक हो गए थे, लेकिन फिर दौरे पड़ने लगे।

मुख्यमंत्री ने किया था मदद का ऐलान : परिजनों के मुताबिक इसी साल जुलाई में मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह ने राजबीर के इलाज में मदद का ऐलान किया था, मगर सरकारी-वादा अब तक पूरा नहीं हुआ है। सोसायटी के अलावा उनकी किसी ने भी सहायता नहीं की। राजबीर के पिता मजदूरी करते हैं।

2015 में जीते थे दो गोल्ड मेडल : गौर हो कि लुधियाना के सियाड़ गांव से संबंधित राजबीर सिंह ने सर्व शिक्षा अभियान के तहत 2015 में अगस्त में लॉस एंजल्स में कराए स्पेशल ओलंपिक गेम्स में हिस्सा लिया था। वहां उन्होंने एक और दो किमी साइकिलिंग रेस में गोल्ड मेडल हासिल किए थे, जिसके बाद उनको हर तरफ शाबाशी मिली, हालांकि वहीं प्रशंसक अब मदद को आगे तक नहीं आए।



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'Gold', double gold medal in Special Olympics, but 'lost' to the system


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‘जीता’ स्पेशल ओलंपिक में डबल गोल्ड मेडल, मगर सिस्टम से ‘हारा’ ‘जीता’ स्पेशल ओलंपिक में डबल गोल्ड मेडल, मगर सिस्टम से ‘हारा’ Reviewed by Dibyendu on 16:09 Rating: 5

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