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बंदिश ‘कासे कहूं बात जिया की, पर तालियों से गूंज उठा हाल

कासे कहूं बात जिया की, एक बार मोहि तक....जैसे ही मलिक बंधुओं ने चौताल में बंदिश पेश की तो सारा हाल संगीतमय हो गया और तालियों से गूंज उठा। बाहर बारिश की ठंडक और संगीत की गर्मी ने श्रोताओं को अलग ही आनंद दिया। डॉ. प्रशांत मलिक और डॉ. निशांत मलिक ने ध्रुपद गायन में राग भीम पलासी पेश किया। आलाप से अपनी प्रस्तुति की शुरुआत करते हुए चार ताल की बंदिशें पेश की। आखिर में सूल ताल की बंदिशें और पुरानी रचना शंभू हरे गंगा धरे... दस मात्रा में गाकर सभी को तालियां बजाने पर मजबूर कर दिया। पखावज पर गौरव उपाध्याय और तानपुरे पर भूपेश ने उनके साथ संगत की।

पंडित जसराज और रागी निर्मल सिंह को समर्पित 145वें हरिवल्लभ संगीत सम्मेलन की शुरुआत सुबह हवन के बाद हरिवल्लभ संगीत विद्यालय के विद्यार्थियों ने सरस्वती वंदना और हरिवल्लभ वंदना पेश करके की। डॉ. अरुण मिश्रा को इस साल श्री बाबा हरिवल्लभ संगीत सम्मेलन सेवा सम्मान दिया गया। यहां पूर्व गवर्नर पुड्डुचेरी इकबाल सिंह, कमेटी की प्रधान पूर्णिमा बेरी, जनरल सेक्रेटरी दीपक बाली, नितिन कपूर, रमेश मोदगिल, पूर्व विधायक केडी भंडारी, पूर्व कैबिनेट मंत्री मनोरंजन कालिया, मन्नण राणा, व्यास कल्याण, सुदर्शन ज्योति, विधायक सुशील कुमार रिंकू, डॉ. सुनीता रिंकू, ओमकार, राजीव, डॉ. अजय सरीन, आशु सिंगला, मास्टर सलीम अादि मौजूद रहे।



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बंदिश ‘कासे कहूं बात जिया की, पर तालियों से गूंज उठा हाल बंदिश ‘कासे कहूं बात जिया की, पर तालियों से गूंज उठा हाल Reviewed by Dibyendu on 16:09 Rating: 5

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