शहर में सोमवार को 4 सांभर शहर और आसपास के गांवों में देखे गए। इनमें एक सांभर की गुरु नानक पुरा रेलवे फाटक के पास ट्रेन के इंजन से टकराने से मौत हो गई। पिछले एक हफ्ते में 10 से अधिक सांभर शहर में आए। 5 को पकड़कर जंगलात विभाग जंगल में छोड़ चुका है और 2 की मौत हो चुकी है। जबकि तीन अभी भी शहर में है।
रेंज अफसर जसवंत सिंह ने कहा कि रोजाना 20 से 30 फोन आसपास के गांवों और शहर में सांभर दिखने के आ जाते हैं। जंगल धीरे-धीरे खत्म होते जा रहे हैं, इसलिए बड़ी तादाद में सांभर शहर की तरफ रुख करने लगे हैं। लोग उनको देखने के लिए जाते हैं तो सांभर डर के मारे भागते हुए अपनी जान गवां लेते हैं।
गुरु नानक पुरा फाटक के पास दिखा सांभर
गुरु नानक पुरा फाटक के पास सुबह 9 बजे के करीब सांभर को देखा गया। इसके बाद लोगों ने पुलिस को सूचना दी गई। जैसे ही लोग इक्ट्ठा होने शुरू हुए तो सांभर भागकर दूसरी तरफ जाने लगा और ट्रेन के इंजन से टकरा गया। करीब 20 फुट दूर तक घिसटता हुआ चला गया। मौके पर जाकर देखा तो सांभर के सिर पर चोट लगी थी और कट चुका था। जंगलात विभाग के कर्मचारी प्रदीप ने बताया कि रविवार को जिस सांभर की मौत हार्ट फैल से हुई थी, उसे दफनाने होशियारपुर आए थे कि फोन आ गया कि एक और सांभर की मौत हो गई।
सांभरों ने गांवों में बना लिए बसेरे-रेंज अफसर जसवंत सिंह ने बताया कि 7-8 साल पहले खाने-पीने की कमी के कारण जंगली जानवर शहर की तरफ रुख करने लगे थे। अब तीन से चार साल में जंगलों की कटाई इतनी तेजी से हो रही है कि जंगली जानवरों ने रैन बसेरे शहर के आसपास गांवों में खेतों में बना लिए हैं। सांभर के कई बच्चे रेस्क्यू किए हैं। जब सर्वे किया बच्चे शहर में क्यों दिखाई दे रहे हैं तो पता लगा कि सांभर अब शहर में रहने लग गए हैं। क्योंकि खाने की कमी है व जंगल खत्म हो रहे हैं।
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