दिल्ली के गुरुद्वारा बंगला साहिब में आने वाले श्रद्धालुओं को कोरोना संक्रमण से बचाने के लिए ‘एआरई एन्टी एंटीमाइक्रोबियल कोटिंग’ की जा रही है। ‘एआरई शील्ड एन्टी एंटीमाइक्रोबियल कोटिंग’ की खासियत यह है कि जिस जगह पर इसकी कोटिंग कर दी जाती है। वह 6 माह तक कोटिंग वाले जगह पर किसी भी वायरस, बैक्टेरिया के संपर्क में आते उसे मार देती है। इसलिए किसी भी वायरस, बैक्टेरिया इसलिए वायरस या बैक्टेरिया इसकी क्रॉस कंटामिनेशन (फैलाव) नहीं हो सकती है। इस कोटिंग को लकड़ी, कपड़ा, चमड़ा, दीवार, फर्श, कांच, इलेक्ट्रॉनिक पर किया जा सकता है, यह सभी पर प्रभावी रहेगी।
सभी बड़े अस्पतालों में हार्ट और ब्रेन के ऑपरेशन थियेटरों में इस ‘एआरई शील्ड एन्टी एंटीमाइक्रोबियल कोटिंग’30 सालों से संक्रमण से बचाव के लिए की जा रही है। कंपनी के डायरेक्टर मनीष मिश्रा ने बताया यह अमेरिका की टेक्नीक है। इस टेक्निक को गुणवत्ता के अंतरराष्ट्रीय लैब ईटीए, एफडीए और भारत के एनिवियल लैब्स के साथ डीआरडीओ से एप्रूव्ड है। कोरोना के संक्रमण के बाद इसे लोगों के बचाव के लिए भारत के वातावरण को ध्यान में रखकर किया गया है। इसे इलेक्ट्रो ऐस्थेटिक स्प्रे मशीन से स्प्रे किया जाता है।
यहां लाखों की संख्या में रोजाना श्रद्धालु आते हैं। कोरोना के संक्रमण के के दौरान कोरोना संक्रमण फैलने का लगातार खतरा था। रोजाना सेनीटाइज्ड करने में मैनपावर और समय की बर्बादी हो रही थी। इसके लिए डीएसजीएमसी की टीम रिसर्च कर रही थी किस तरह से धार्मिक स्थल पर कोरोना के संक्रमण के फैलाव को लंबे समय तक किस तरह से रोका जाए। जब इसकी स्टडी की की गई तो ‘एआरई शील्ड एन्टी एंटीमाइक्रोबियल कोटिंग’ की जानकारी मिली। इसके बाद कंपनी से संपर्क कर इसकी कोटिंग करवाई जा रही है।
-मनजिंदर सिंह सिरसा, अध्ययक्ष, डीएसजीएमसी
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