धान की लिफ्टिंग को लेकर ट्रैक्टर-ट्राॅली ऑपरेटर और कैंटर ऑपरेटर का विवाद अभी भी बरकरार है। गत 16 अक्टूबर को भी यूनियन ने इस संबंधी रोष प्रकट किया था परन्तु प्रशासन द्वारा इस मामले में कोई ठोस हल नहीं निकाला गया जिसके चलते सोमवार काे फिर से गिद्दड़बाहा के मिनी कैंटर यूनियन के ऑपरेटराें ने काम न मिलने के कारण जहां सरकार, ठेकेदार और सिविल प्रशासन के विरुद्ध नारेबाजी की वहीं माननीय हाईकोर्ट द्वारा दिए गए स्टे आर्डर की दुहाई देकर कैंटर ऑपरेटर को काम देने की अपील की।
उन्होंने बताया कि इतना ही नहीं परमिट के साथ ट्रैक्टर ट्राली पर केवल 80 गट्टे धान ही लोड हो सकता है परन्तु यह नियमों को ताक पर रख कर 300 गट्टे लोड कर रहे हैं। इस माैके पर कैंटर आपरेटर सतनाम सिंह, सुरेश कुमार, मेला राम भूदंड, सुखमंदर सिंह, बलविन्द्र सिंह, अमरीक सिंह, केवल समाघ, गुरप्रेम सिंह और हरगोबिंद सिंह आदि ने बताया कि कैंटर चालकों को फरवरी 2018 में माननीय हाईकोर्ट ने एक स्टे दिया था।
जिसके अनुसार मंडियों में से गेहूं और धान की लिफ्टिंग का काम ट्रक और कैंटर ही करेंगे इस काम के लिए ट्रैक्टर-ट्रालियां का प्रयोग नहीं किया जा सकता परंतु हाईकोर्ट के आदेशों के बावजूद ट्रैक्टर-ट्राली ऑपरेटराें द्वारा मंडियों में से धान की लिफ्टिंग की जा रही है।
कैंटर ऑपरेटर ने बताया कि काम न मिलने के चलते उनको अपने मोटरसाइकिल पर टायर बेचकर कैंटरों की किश्तों का भुगतान करना पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि वह सरकार को टैक्स, बीमे और पासिंग फीसों की अदायगी करते हैं जबकि ट्रैक्टर ऑपरेटर ऐसी कोई भी फीस सरकार के पास अदा नहीं करते। उधर जब इस संबंधी एसडीएम ओम प्रकाश से बातचीत करनी चाही तो उनके साथ संपर्क नहीं हो सका।
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