प्रदेश सरकार व सेहत विभाग की तरफ से सिविल अस्पताल में मरीजों को किसी भी तरह की कोई भी परेशानी नहीं होने देने के दावे किए जा रहे है, लेकिन उन दावों की पोल खुलती नजर आ रही है। सिविल अस्पताल में आने वाले मरीजों को अस्पताल के अधिकतर डॉक्टरों वह दवाएं लिखकर दे रहे हैं जो कि अस्पताल के अंदर नहीं मिलतीं। सिविल अस्पताल में इलाज करवाने आईं 70 वर्षीय सत्यादेवी ने कहा कि वह सिविल में नार्मल चेकअप कराने आई थी। डॉक्टर ने चैकअप के बाद उसे दवाओं की लिस्ट लिख कर दे दी। जोकि अस्पताल के बाहर मेडिकल स्टोर से मिलनी हैं, इनकी कीमत 500 रुपए है। सत्यादेवी ने कहा कि गरीब होने की वजह से वह इतनी महंगी दवाई नहीं ले सकीं। सत्या देवी ने कहा कि वह सरकार व सेहत विभाग मांग करती है। अस्पताल में ही दवाइयां उपलब्ध करवाई जाएं।
सिविल में निजी अस्पताल से महंगा इलाज: मरीज
वहीं अस्पतला में इलाज कराने पहुंची सुषमा ने कहा कि सिविल अस्पताल सिर्फ नाम का ही सरकारी है। इसमें इलाज निजी अस्पताल से भी महंगा है। सुषमा ने आरोप लगाया कि उसे डॉक्टर ने करीब 8 तरह की दवाइयां लिख कर दी हैं। इसमें से एक ही दवा उसे सिविल अस्पताल से मिली है। बाकी दवाइयां बाहर से मिलेंगी। इनकी कीमत 600 रुपए है। सुषमा ने कहा कि वह उच्च अधिकारियों से मांग करते है कि अस्पताल से लिखी जाने वाली सारी दवाइयां अस्पताल में ही उपलब्ध करवाई जाएं।
200 तरह की दवाइयां अस्पताल में उपलब्ध: एसएमओ भल्ला
सिविल अस्पताल के एसएमओ संजीव भल्ला ने कहा कि 200 तरह की दवाइयां अस्पताल में मरीजों को दी जाती हैं। डॉक्टरों की तरफ से अधिकतर दवाइयां बाहर की लिखी जाने पर एसएमओ ने कहा कि ऐसा नहीं हैं। कई बार मरीज की गंभीर हालत देखते हुए दवाई अस्पताल में न होने की वजह से बाहर लिख दी जाती है। फिर भी अगर किसी तो परेशानी हुई है तो जांचकर समस्या का समाधान करेंगे।
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